Chief Minister Mahalaxmi Yojana 2021 Uttarakhand In Hindi|मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना उत्तराखंड :

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मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना उत्तराखंड 2021 , योजना का उद्देश्य , लक्ष्य , महालक्ष्मी किट , सामग्री , दस्तावेज और नियम [ Chief Minister Mahalaxmi Yojana Uttarakhand 2021 in hindi ] ( Objective of yogna , target , mahalaxmi kit , Material , documents and rules )

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महालक्ष्मी योजना क्या है :

महालक्ष्मी योजना उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के द्वारा 17 जुलाई 2021 को शुरू की गई थी। इस योजना से प्रसव के उपरांत महिलाओं को एक रक्षा कवच के रूप में एक किट प्रदान की जाएगी ,जिसमें उनकी आवश्यकताओं के अनुसार कुछ सामग्रियां दी गई हैं. उत्तराखंड में पहाड़ में रहने वाली महिलाओं और गरीब महिलाओं की स्थिति दयनीय है क्योंकि वह प्रसव के समय बहुत सारी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकती हैं ,उन्हें प्रसव के समय समस्या ना हो इसके लिए यह योजना शुरू की गई है ,और उत्तराखंड में लिंगानुपात भी बहुत कम है ,इसलिए महिलाओं को समाज में समान स्थान दिलाने के लिए और लोगों की महिलाओ व कन्याओ के प्रति सोच को बदलने के लिए भी यह योजना शुरु की गई है।

महालक्ष्मी योजना का उद्घाटन कब और कहां हुआ:

इस योजना का उद्घाटन 17 जुलाई 2021 को देहरादून के भुड़गांव ,यमुना कॉलोनी से हुआ। इस योजना का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से किया, उनके साथ महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने भी महिलाओं को किटे वितरित की ।

सबसे पहले इस योजना से लाभान्वित की गई महिला का नाम श्रीमती सुशीला है जिसे मुख्यमंत्री द्वारा पहली किट प्रदान की गई।

उद्घाटन के दिन ही उत्तराखंड के अलग-अलग जनपदों में इस योजना से 16929 लोगों को लाभान्वित किया गया। उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी जिला अधिकारियों के द्वारा महालक्ष्मी किट लाभार्थियों को प्रदान की गई।

महालक्ष्मी योजना का उद्देश्य व लक्ष्य:

1- यह योजना महिला सशक्तिकरण से संबंधित है। उत्तराखंड सरकार ने पहले चरण में 50000 महिलाओं व नवजात कन्याओं को इस योजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा है।

2- उत्तराखंड में लिंगानुपात बहुत कम है अर्थात 1000 पुरुषो पर 960 महिलाएं है। इसलिए लैंगिक असमानता को दूर करने और लिंगानुपात में वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।

3- इस योजना का लक्ष्य है बेटियों को प्रोत्साहित करना , क्योंकि आज भी समाज में कन्याओं के जन्म पर लोगों में बहुत सारे मतभेद हैं. कन्याओं को समाज में पुरुषों के समान स्थान नहीं मिल पाता इसलिए उन्हें समाज में बराबरी का स्थान दिलाने के लिए इस योजना को जारी किया गया है।

4- यह योजना कन्याओं के जन्म में बढ़ोतरी व कन्याओं के प्रति समानता को बढ़ाने हेतु लागू की गई है।

5- यह योजना गर्भवती माता व कन्या शिशु के पोषण और अतिरिक्त देखभाल के उद्देश्य से संचालित की गई है।

6- इस योजना का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण से है। क्योंकि उत्तराखंड में कुछ ऐसे स्थान हैं जहां पर गर्भवती महिलाओं को बहुत ही असुविधा होती है गर्भावस्था के दौरान और कुछ महिलाएं बहुत गरीब है जो गर्भावस्था के दौरान अच्छा पोषण नहीं ले पाती इसलिए उन्हें और उनके बच्चे की देखभाल के लिए यह किट दी जा रही है।

महालक्ष्मी किट में मिलने वाली सामग्री:

mahalaxmi yojna kit

महालक्ष्मी किट गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान दी जाएगी और पहली दो बालिकाओं या जुड़वा बालिकाओं के जन्म पर माता को भी और नवजात कन्या शिशु को भी यह किट अलग-अलग प्रदान की जाएगी, पहली किट गर्भावस्था के दौरान और अगर कन्या शिशु जन्म लेती है तो दूसरी किट कन्या शिशु के पैदा होने पर मिलेगी।

सामग्री गर्भवती महिला के लिए सामग्री कन्या शिशु के लिए
250 ग्राम बादाम गिरी 2 जोड़ी सूती कपड़े
अखरोट 2 जोड़ी गर्म कपड़े
सूखे खुमानी टोपी
500 ग्राम छुआरा मोजे
2 जोड़ी मौजे 12 लंगोट
स्कार्फ तौलिया
2 तौलीये बेबी शॉप
गरम शॉल रबर शीट
कंबल गर्म कंबल
बेडशीट टीकाकरण कार्ड
दो पैकेट सैनिटरी नैपकिन पोषाहार कार्ड
500 ग्राम सरसों का तेल
नहाने वह कपड़े धोने के साबुन
नेल कटर

महालक्ष्मी योजना का लाभ लेने हेतु दस्तावेज और नियम :

1- गर्भवती महिला का पंजीकरण नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र में होना चाहिए।

2- परिवार रजिस्टर की फोटोकॉपी होनी चाहिए।

3- पहली, दूसरी तथा जुड़वा कन्या के जन्म हेतु स्वप्रमाणित घोषणा।

4- सरकारी तथा प्राइवेट माता-शिशु रक्षा कार्ड की फोटोकॉपी,(MCP कार्ड)

5- नियमित सरकारी /अर्द्ध सरकारी सेवक तथा आयकर दाता ना होने का प्रमाण पत्र।

6- संस्थागत प्रसव प्रमाण पत्र ( यदि किसी आकस्मिक कारण से रास्ते या घर में प्रसव हुआ है ) तो आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री / आशावर्कर या चिकित्सक द्वारा जारी प्रमाण पत्र।

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